कला समेकित शिक्षा
कला समेकित शिक्षा
आईये इसका अर्थ जानलें - कला के साथ शिक्षा को जोड़ना।
यानि कला+शिक्षा।
कला - कोई भी कला (चित्रकला, मूर्तिकला, कठपुतली कला, तकनीक, दृश्य- श्रव्य कला, लेखन, हाव-भाव, फोटोग्राफी, मंच सज्जा, मूक-अभिनय, मार्शल, जादू, मौखिक कौशल, सिनेमा आदि) का एकीकरण शिक्षा के साथ किया जाए, तो सभी विषयों को आसान, रोचक आकर्षक बनाया जा सकता है। ऐसी शिक्षा बाल केंद्रित हृदय और मस्तिष्क पर छाप छोड़ने वाली, अनुभवकारी, बेहतर और सर्वांगीण विकास करने वाली होती है, जो 21वीं सदी की जरूरत भी है।
चलिए हिंदी विषय को ले लें। हमें संज्ञा समझना है, तो कठपुतली कला द्वारा सीता राम वनवास गए, पर आधारित गतिविधि द्वारा रोचक आकर्षक आसान शिक्षा दी जा सकती है।
अब अंग्रेजी में "द ट्री" (The Tree) पढ़ाना है, तो मंच सज्जा चित्रकला द्वारा शिक्षा दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर caterpillar पढ़ाने के लिए उसका चित्र या गत्ते की caterpillar बनवाकर कला के माघ्यम से रचनात्मक और रोचक जानकारी दी जा सकती है।
गणित विषय को तो अनेक रोचक तरीकों से कला समेकित बनाया जा सकता है, जैसे संख्या पट्टी, संख्या कार्ड बच्चे बनाएं, अंको का जादू, सांप सीढ़ी, अनेक गणितीय खेल जिसमें बच्चे सक्रिय रहें, आकृतियां बनवा कर कला के द्वारा आसान बना सकते हैं।
पर्यावरण समूचा ही कला से जुड़ा है, इसका कोई भी बिंदु कला के बिना सूना है। आसपास की खोज में दर्शनीय स्थलों पर कलाकृतियां भरी पड़ी हैं। जो बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। हवा, पानी, भोजन आश्रय पर कला से जुड़ी गतिविधियां करके कला समेकित और रोचक बना सकते हैं।
सामाजिक विज्ञान की तो बात ही निराली है। इसकी कला के बिना शिक्षा सूनी लगती है। इसमें इतिहास की घटनाओं पर नाटक कहानी लेखन किया जाए तो मजा ही कुछ और होगा। इसके अलावा मूर्ति कला, चित्रकला और कठपुतली कला के माध्यम से रीति- रिवाज, सभ्यता- संस्कृति को समझाया जा सकता है।
भूगोल विषय में पहाड़, चट्टान, मानचित्र और पृथ्वी की आकृतियों पर चित्र बनवा कर रोचक और आकर्षक बना सकते हैं। इसी प्रकार अर्थशास्त्र को बाल मेला लगवा कर, तोल भाव की कलाओं से, बाजार मूल्य से बच्चों को परिचित कराया जा सकता है और इस तरह अनेक कलाओं से जोड़कर इन विषयों को रोचक और आकर्षक बनाया जा सकता है।
विज्ञान को कला समेकित विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से करते ही हैं। बिना प्रयोग किए विज्ञान का ज्ञान प्राप्त किया ही नहीं जा सकता, क्योंकि सत्यता या प्रमाणित किया हुआ ज्ञान ही तो विज्ञान है। बच्चे अपने हाथों से, स्वयं की मर्जी से, अपनी योग्यता का प्रयोग करते हुए विज्ञान में नित नए प्रयोग कर सकते हैं।
कला समेकित शिक्षा से नई ऊर्जा का संचार होता है। सुबह प्रार्थना सभा, नित्य नई बोलियों में प्रार्थना उसके उपरांत कविता, कहानी वाचन, स्थानीय समाचार वाचन, अनमोल वचन क्रियाकलाप, प्रति शनिवार बाल-सभा में गीत, नाटक, लोक नृत्य, पहेलियां, अंताक्षरी किए जाते रहें।
शिक्षा को आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए कार्यशाला के हर दिन का आरंभ विभिन्न क्रियाकलापों के साथ प्रतिभागियों को शत-प्रतिशत भागीदारी के साथ कलाओं को बढ़ावा देने वाला हो। कला समेकित शिक्षा पर जोर देने की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि इससे शिक्षा में आकर्षण, रोचकता, रचनात्मकता, सौंदर्यीकरण यहां तक कि अमिट छाप छोड़ने वाला ज्ञान जो कि बेरोजगारी को टिकने नहीं देगा प्राप्त होगा।